- द्रव्य की प्रकृति : रसायन विज्ञान, विज्ञान की वह शाखा है; जिसके अंतर्गत पदार्थों के गुण, संघटन, संरचना तथा उसमे होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन किया जाता है।
- लैवासिए को रसायन विज्ञान का जनक कहा जाता है।
- द्रव्य सूक्ष्म (छोटे-छोटे) कणों से मिलकर बना है, जिन्हे अणु कहते हैं, अणु परमाणुओं से मिलकर बनते हैं तथा स्वतंत्र अवस्था मे रह सकते हैं।
- अणु सदैव गतिशील अवस्था में रहते हैं अर्थात् इनमें गतिज ऊर्जा होती है।ताप बढाने से इनकी औसत गतिज ऊर्जा बढ जाती है।
- कणों की गति को ब्राउनी गति कहते हैं।
- संघनन: किसी पदार्थ के वाष्प से द्रव अवस्था में परिवर्तन होने की क्रिया को संघनन कहते हैं।
- ऊर्ध्वपातन: कुछ पदार्थ जैसे आयोडीन, कपूर, अमोनिया, क्लोराइड या नौसादर आदि साधारण ताप पर ही ठोस अवस्था से सीधे वाष्प अवस्था में परिवर्तित हो जाते हैं, इस क्रिया को ऊर्ध्वपातन कहते हैं।
- तत्व वे मूल पदार्थ हैं जिनमे एक ही प्रकार के परमाणु होते हैं। वर्तमान मे 117 तत्व ज्ञात हैं।
- हीरा तथा ग्रेफाइट भी तत्व हैं, ये दोनों कार्बन के अपरूप हैं।
- तत्व द्रव्य की ठोस,द्रव तथा गैस तीनों अवस्थाओं में पाये जाते हैं। उदाहरण: सोडियम तथा कार्बन तत्व ठोस हैं, पारा और ब्रोमीन द्रव हैं, हाइड्रोजन और आक्सीजन गैस हैं।
- पारा ही केवल ऐसा धात्वीय तत्व है जो साधारण ताप पर द्रव अवस्था में पाया जाता है।
- हाइड्रोजन सबसे हल्का तत्व है जिसका प्रमाणु क्रमांक 1 है।
- जल तीनों भौतिक अवस्थाओं में रह सकता है।
- जल (H2O) एक यौगिक है। यह हाइड्रोजन तथा आक्सीजन के द्रव्यमान के अनुसार 1:8 के निश्चित अनुपात में रासायनिक संयोग से बना है अथवा जल मे परमाणु- क्रमांक 1 तथा 8 के परमाणु संख्या के अनुसार निश्चित अनुपात 2:1 मे पाये जाते हैं।
- कार्बन डाई आक्साइड का अणु- सूत्र CO2 है, यह एक यौगिक है।
- साधारण नमक (सोडियम क्लोराइड) भी एक यौगिक है। यह सोडियम और क्लोरीन के एक-एक परमाणु के परस्पर संयोग से बना है। इसका अणु-सूत्र NaCl है।
- वायु आक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन डाई आक्साइड, आर्गन,तथा जल वाष्प इत्यादि का मिश्रण है।
- बारूद पोटैशियम नाइट्रेट (शोरा), गंधक तथा चारकोल का मिश्रण है।
- पीतल तांबे (कापर) और जस्ते (जिंक) का मिश्रण है।
- पारा द्रव धातु एवं तत्व तीनों है।
- ढला हुआ लोहा, बर्फ, एण्टीमनी, पीतल आदि गलने पर आयतन में सिकुडते हैं।
- सांचे में केवल वे पदार्थ ढाले जा सकते हैं जो ठोस बनने पर आयतन मे बढते हैं, क्योंकि तभी वे सांचे के आकार को पूर्णतया प्राप्त कर सकते हैं।
- चांदी एवं सोने की मुद्राएं ढाली नहीं जाती,केवल मुहर लगाकर बनाती हैं।
- मिश्र धातुओं का द्रवणांक उन्हे बनाने वाले पदर्थों के गलनांक से कम होता है, क्योंकि अशुद्धियाँ डाल देने से पदार्थ का गलनांक घट जाता है
- क्वथनांक जितना कम होगा, वाष्पन की क्रिया उतनी ही अधिक तेजी के साथ होगी।
- द्रव के पृष्ठ पर वायु का दाब जितना ही कम होगा वाष्पन उतनी ही तेजी के साथ होगा।
- वह नियत ताप जिस पर कोई द्रव उबलकर द्रव अवस्था से वाष्प की अवस्था में परिवर्तित हो जाए तो वह नियत ताप द्रव का क्वथनांक कहलाता है।
- दाब बढाने पर द्रव का क्वथनांक बढ जाता है,तथा दाब घटाने से द्रव का क्वथनांक घट जाता है। परमाणु संरचना:
- परमाणु: यह तत्व का वह छोटा से छोटा कण है, जो किसी भी रासायनिक अभिक्रिया मे भाग ले सकता है परंतु स्वतंत्र अवस्था में नहीं रह सकता है।
- अणु: तत्व तथा यौगिक का वह छोटा से छोटा कण जो स्वतंत्र अवस्था मे रह सकता है, अणु कहालाता है।
RakeshMgs

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