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Introduction to internet in Hindi इण्टरनेट का परिचय हिंदी में

शनिवार, मार्च 02, 2019

इण्टरनेट का परिचय 

internet

इंटरनेट कम्युनिकेशन का एक महत्वपूर्ण व दक्ष माध्यम है, जिसने काफी लोकप्रियता और जीत हासिल की है, इंटरनेट के माध्यम से लाखों व्यक्ति सूचनाओं विचारों ध्वनि वीडियो क्लिप्स इत्यादि को कंप्यूटरों के जरिए पूरी दुनिया में एक दूसरे के साथ शेयर कर सकते हैं
वर्ल्ड वाइड वेब इंटरनेट का सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है जिस पर सभी विषयों से संबंधित जानकारियां उपलब्ध है वह वर्ल्ड वाइड वेब इंटरनेट पर उपलब्ध इंटरकनेक्टेड डाक्यूमेंट्स और रिसोर्सेज का एक समूह है या इसे हम  वेबसाइट भी कहते हैं।
एक वेब पेज को वर्ल्ड वाइड वेब पर देखने के लिए वेब ब्राउजर सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया जाता है वेब ब्राउजर एक तरह का क्लाइंट सॉफ्टवेयर है वह ब्राउज़र पर पेज का एड्रेस या यूआरएल टाइप करके भेजिए वेबसाइट को देखा जा सकता है वापी से संपर्क करने के लिए एचटीटीपी हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल का उपयोग किया जाता है एचटीटीपी एक प्रकार का प्रोटोकाल है जिसमें इंटरनेट पर सेवा प्रदान करने वाले कंप्यूटर वेब सर्वर तथा उसका उपयोग करने वाला वेब क्लाइंट कहलाता है प्रत्येक वेब पेज एचटीएमएल हाइपर टेक्स्ट मार्कअप लैंग्वेज में लिखा जाता है।

कंप्यूटर नेटवर्क

 जब दो या दो से अधिक कंप्यूटर किसी माध्यम की सहायता से परस्पर संपर्क में रहते हैं तो इस व्यवस्था को कंप्यूटर नेटवर्क कहते हैं इसे महत्वपूर्ण डाटा तथा सूचनाओं को इन कंप्यूटरों में उपलब्ध कराया जाता है कंप्यूटर नेटवर्क से हमारा तात्पर्य आसपास याद और बिखरे हुए कंप्यूटरों को इस प्रकार
जोड़ने से है कि उनमें से प्रत्येक कंप्यूटर किसी दूसरे के साथ स्वतंत्र रूप से संपर्क बना कर संदेशों का आदान प्रदान कर सके और एक दूसरों के साधनों सुविधाओं को साझा कर सकें।

नेटवर्किंग के लाभ कंप्यूटर नेटवर्किंग से हमें निम्नलिखित लाभ होते हैं-

साधनों का साझा 

नेटवर्क किसी भी कंप्यूटर से जुड़े हुए साधन का उपयोग नेटवर्क अन्य कार्य करते हुए कर सकते हैं उदाहरण के लिए यदि किसी कंप्यूटर के साथ लेज़र प्रिंटर जुड़ा हुआ है तो नेटवर्क के अन्य कंप्यूटर से उस प्रिंटर पर कोई भी सामग्री छापी जा सकती है।

डेटा का तीव्र सम्प्रेषण 

कंप्यूटरों की नेटवर्किंग से दो कंप्यूटरों के बीच सूचना का आदान प्रदान तीव्र तथा सुरक्षित रूप से होता है इससे कार्य की गति तेजी से होती है और समय की बचत होती है। 

विश्वसनीयता

नेटवर्किंग में किसी फाइल की दो या अधिक प्रतियां अलग-अलग कंप्यूटरों पर स्टोर की जा सकती है यदि किसी कारणवश एक कंप्यूटर खराब या असफल हो जाता है तो वह डाटा दूसरे कंप्यूटर से प्राप्त हो सकता है इस प्रकार नेटवर्क के कंप्यूटर एक दूसरे के लिए बैकअप का कार्य करते हैं जिससे उसकी विश्वसनीयता बढ़ती है। 

कंप्यूटर नेटवर्क के अवयव 

कोई कंप्यूटर नेटवर्क अभिनेता तुम हो या अवयवों का समुच्चय होता है इनमें से कुछ प्रकार अवयवों का परिचय नीचे दिया गया है-

सर्वर 

नेटवर्क का सबसे प्रमुख अथवा केंद्रीय कंप्यूटर होता है, नेटवर्क के अन्य सभी कंप्यूटर सर्वर से जुड़े होते हैं  सर्वर क्षमता और गति की दृष्टि से अन्य सभी कंप्यूटरों में से श्रेष्ठ होता है और प्रायः नेटवर्क का अधिकांश अथवा समस्त डाटा सर्वर पर ही रखा जाता है 

नोड 

सर्वर के अलावा नेटवर्क के अन्य सभी कंप्यूटरों को नोड कहा जाता है यह वह कंप्यूटर होते हैं जिन पर उपयोगकर्ता कार्य करते हैं प्रत्येक नोड का एक निश्चित नाम और पहचान होती है कई नोड अधिक शक्तिशाली होते हैं ऐसे नोडो को वर्क स्टेशन कहा जाता है नोडो को प्रायः क्लाइंट भी कहा जाता है। 

नेटवर्क केबल 

जिन केबलों के द्वारा नेटवर्क के कंप्यूटर आपस में जुड़े होते है उन्हें नेटवर्क केबल कहा जाता है। सूचनाएँ  कंप्यूटर से नेटवर्क दूसरे कंप्यूटर तक केबलों से होकर जाती है। इनको प्रायः बस भी कहा जाता है। 

नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम 

यह ऐसा सॉफ्टवेयर है जो नेटवर्क में एक साथ जुड़े कंप्यूटरों के बिच सम्बन्ध तय करता है और उनके बिच सुचना का आवागमन को नियंत्रित करता है। सॉफ्टवेयर सर्वर में लोड किया जाता है।

नेटवर्क कार्ड 

यह एक ऐसा सर्किट होता है जो नेटवर्क केबलों  को कंप्यूटर से जोड़ता है। इन कार्डों की सहायता से डाटा का आवागमन तीव्रता से होता है। यह कार्ड नेटवर्क से जुड़े प्रत्येक कंप्यूटर के मदरबोर्ड में लगाए जाते हैं, इनको इथरनेट कार्ड भी कहा जाता है।

प्रोटोकाल 

वह प्रणाली जो संपूर्ण संचार प्रक्रिया में विभिन्न देशों के मध्य सामंजस्य स्थापित करती है प्रोटोकोल कहलाती है प्रोटोकाल की उपस्थिति में ही डाटा तथा सूचनाओं को प्रेक्षक से लेकर प्राप्तकर्ता तक पहुंचाया जाता है कंप्यूटर का आधार भी प्रोटोकाल ही है

रिपीटर 

रिपीटर्स इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होते हैं जो निम्न स्तर के सिगनल्स को प्राप्त करके उन्हें उच्च स्तर का बना कर वापस भेजते हैं इस प्रकार सिगनल्स लंबी दूरियों को बिना बाधा के तय कर सकते हैं रिपीटर्स का प्रयोग नेटवर्क में कंप्यूटरों को एक दूसरे से जोड़ने वाले केवल की लंबाई बढ़ाने में किया जाता है

हब 

हब का प्रयोग ऐसे स्थान पर किया जाता है जहां नेटवर्क की सारी केवल मिलती है यह एक प्रकार का रिपीटर होता है जिसमें नेटवर्क चैनलों को जोड़ने के लिए फोर्स लगे होते हैं आमतौर पर एक हद में 4 8 16 अथवा 24 पोर्ट लगे होते हैं। एक बड़े हब में करीबन 24 कंप्यूटरों को जोड़ा जा सकता है इससे अधिक करने के लिए एक अतिरिक्त हब का प्रयोग किया जा सकता है इस प्रक्रिया (दो या दो से अधिक हबों को आपस में जोड़ना ) को डेजी चेनिंग कहते हैं।

गेटवे

गेटवे एक ऐसी युक्ति है जिसका प्रयोग दो विभिन्न नेटवर्क प्रोटोकोल को जोड़ने में किया जाता है इन्हें प्रोटोकोल परिवर्तक भी कहते हैं

स्विच 

स्विच वे हार्डवेयर होते हैं जो विभिन्न कंप्यूटरों को एक लैन (LAN) में जोड़ते हैं स्विच को हब के स्थान पर उपयोग किया जाता है अब तथा स्विच के मध्य एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि हब स्वयं तक आने वाले डाटा को अपने प्रत्येक पोर्ट पर भेजता है जबकि स्विच स्वयं तक आने वाले डाटा को केवल उसके गंतव्य स्थान तक भेजता है।

राउटर 

राउटर का प्रयोग नेटवर्क में डाटा को कहीं भी भेजने में करते हैं इस प्रक्रिया को राउटिंग कहते हैं राउटर एक जंक्शन की तरह कार्य करते हैं बड़े नेटवर्क में एक से अधिक रूट होते हैं जिनके जरिए सूचनाएं अपने गंतव्य स्थान तक पहुंच सकती है ऐसे में राउटर्स यह तय करते हैं कि किसी सूचना को किस रास्ते से उसके गंतव्य तक पहुंचाना है।

राउटिंग 

राउटिंग स्विच ऐसी स्विच, जिनमे राउटर जैसी विशेषताएं होती है राउटिंग स्विच कहलाती है राउटिंग स्विच नेटवर्क की किसी कंप्यूटर तक भेजी जाने वाली सूचनाओं को पहचान कर, उन्हें  रास्ता दिखाते है।

ब्रिज 

ब्रिज  छोटे नेटवर्को को आपस में जोड़ने के काम आते हैं ताकि यह आपस में जुड़कर एक बड़ी नेटवर्क की तरह काम कर सके ब्रिज एक बड़े व्यस्त नेटवर्क को छोटे हिस्सों में बांटने का भी कार्य करता है।

मॉडेम 

मॉडेम एनालॉग सिगनल्स को डिजिटल सिगनल्स में तथा डिजिटल सिगनल्स को एनालॉग सिगनल्स में बदलता है एक मॉडेम को हमेशा एक टेलीफोन लाइन तथा कंप्यूटर के मध्य लगाया जाता है डिजिटल सिग्नल को एनालॉग सिग्नल्स में बदलने की प्रक्रिया को माड्यूलेशन तथा एनालॉग सिगनल्स को डिजिटल सिगनल्स में बदलने की प्रक्रिया को डिमाड्यूलेशन करते हैं।