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Electronic data and instructions Hindi Notes for CCC Computer Course इलेक्ट्रॉनिक डेटा और निर्देश हिंदी नोट्स सीसीसी कंप्यूटर कोर्स के लिए

सोमवार, जून 10, 2019

 CCC Computer Course

एनालॉग एंव डिजिटल सिग्नल-



आप जानते हैं कि मानव की तरह कंप्यूटर सूचना की पहचान नहीं कर सकता है। यदि हम किसी से दो संख्याओं का जोड़ करवाना चाहते हैं, हम कहेंगे “कृपया 2 और 7 को जोड़िए”। हम इस रूप में कंप्यूटर को निर्देश नहीं दे सकते। सिस्टम यूनिट एक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट है और यह मानव की भाषा को प्रोसेस नहीं कर सकती है। हमारी ध्वनि “एनालॉग” या लगातार सिग्नल तैयार करती है जो विभिन्न पिच और टोन का अलग-अलग प्रतिनिधित्व करती है। किंतु, कंप्यूटर केवल “डिजिटल” इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को पहचान सकता है। इसलिए कंप्यूटर द्वारा किसी निर्देश का पालन कर सकने से पहले इसे ऐसे रूप में बदलने की आवश्यकता होती है जिसे कंप्यूटर समझ सके।



दशमलव प्रणाली-


आप “दशमलव प्रणाली” से परिचित हैं जिसमें दस डिजिट (0-9) होते हैं। डेटा एवं निर्देश देने के लिए कंप्यूटर दो-पद यानी “बाइनरी सिस्टम” का उपयोग करता है। इसमें केवल दो डिजिट 0 और 1 होते हैं। प्रत्येक 0 या 1 एक “बिट” कहलाता है– यह “बाइनरी डिजिट” का संक्षिप्त रूप होता है। अक्षर, संख्या एवं विशेष कैरेक्टर को प्रस्तुत करने के लिए बिट्स आठ के समूहों में मिलती है जिनको “बाइट्स” कहते हैं। प्रत्येक बाइट एक अक्षर का प्रतिनिधित्व करती है।



बाइनरी कोडिंग स्कीम-


“बाइनरी कोडिंग स्कीम” का उपयोग करके कंप्यूटर में अक्षरों को प्रस्तुत किया जाता है। बाइनरी कोडिंग स्कीम प्रत्येक अक्षर के लिए विशिष्ट बाइनरी नंबर को निरूपित करती है। ASCII और EBCDIC दो सबसे लोकप्रिय बाइनरी कोडिंग स्कीम हैं, जो आठ बिट्स या एक बाइट का उपयोग करते हैं। एक नया विकसित कोड, यूनिकोड है जो 16 बिट्स का उपयोग करता है।


एएससीआईआई (ASCII)


एएससीआईआई का तात्पर्य “अमेरिकन स्टैंडर्ड कोड फ़ॉर इन्फ़ॉर्मेशन इंटरचेंज” से है। एएससीआईआई एक कोड है, जिसमें अंग्रेज़ी के कैरेक्टरों को संख्याओं के रूप में प्रदर्शित करते हैं, जिसमें प्रत्येक अक्षर को 0 से 127 तक कोई संख्या प्रदान की जाती है। उदहारण के लिये, अपरकेस ‘ए’ के लिये एएससीआईआई का कोड 65 है। यह कंप्यूटर के लिये सर्वाधिक उपयोग किया जाने वाला बाइनरी कोड है, जो एक कंप्यूटर से दूसरे में डेटा को स्थानांतरित करना संभव बनाता है।



ईबीसीडीआईसी (EBCDIC)


ईबीसीडीआईसी का तात्पर्य “एक्सटेंडेड बाइनरी कोडेड डेसिमल इंटरचेंज कोड” से है। यह आईबीएम के द्वारा विकसित की गयी 8-बिट कैरेक्टर एन्कोडिंग है और प्राथमिक रूप से इसका उपयोग मेनफ़्रेम कंप्यूटर के लिये होता है। इसे 7-बिट एएससीआईआई एन्कोडिंग स्कीम से अलग विकसित किया गया था। यद्यपि बड़े पैमाने पर इसका उपयोग आईबीएम कंप्यूटर में होता है, पीसी और मैकिंटोश सहित अधिकांश अन्य कंप्यूटर एएससीआईआई कोड का उपयोग करते हैं।


यूनिकोड



यूनिकोड एक 16-बिट कोड है, जिसकी संरचना मूल रूप से चीनी और जापानी जैसी अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं को सहयोग देने के लिये की गयी थी। इन भाषाओं में अक्षरों की संख्या 8-बिट कोड के द्वारा प्रस्तुत कर सकने की अपेक्षा बहुत अधिक है। इसे उद्योग में स्थिर एन्कोडिंग, विश्व की अधिकांश लेखन-प्रणाली में अभिव्यक्त टेक्स्ट को प्रस्तुत करने और रखरखाव के लिये मानक माना जाता है। यूनिकोड के नवीनतम वर्ज़न में 93 लिपियों के 109,000 से अधिक कैरेक्टर शामिल हैं।


कोडिंग स्कीम की अनिवार्यता



हार्डवेयर डिज़ाइनर एवं कंप्यूटर प्रोग्रामर विभिन्न प्रकार की कठिनाईयों का पता लगाने के लिए कोडिंग स्कीम का उपयोग करते हैं। इस तरह दक्ष यूज़र को कोडिंग स्कीम को महत्व देना आवश्यक होता है। क्योंकि यह डेटा किसी ख़ास कोडिंग स्कीम का उपयोग करके कंप्यूटर द्वारा तैयार होता है किसी दूसरी कोडिंग स्कीम का उपयोग करने पर कंप्यूटर द्वारा प्राप्त नहीं किया जा सकता है। एक कोडिंग स्कीम से दूसरे में डेटा के अनुवाद में मदद के लिए विशेष कनवर्ज़न प्रोग्राम मौजूद होते है।


सॉफ़्टवेअर



कंप्यूटर सिस्टम के सॉफ़्टवेयर का तात्पर्य निर्देशों की व्यवस्थित सूची से है, जो कंप्यूटर के कार्यकलापों के कार्य को नियंत्रित करता है। सॉफ़्टवेयर का उद्देश्य डेटा (बिना संशोधित कार्य) को सूचना (संशोधित कार्य) में बदलना है। कुछ प्रोग्रामों का उपयोग कंप्यूटर द्वारा अपने कार्य एवं डिवाइस को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।


प्रोग्राम



कंप्यूटर मात्र हार्डवेअर के माध्यम से कोई भी काम करने में अक्षम होता है। हमारी इच्छानुसार कार्य करने हेतु, इसे आदेश देने पड़ते हैं। इस प्रकार के "आदेशों" का "समुच्चय" (सैट) "प्रोग्राम" कहलाता है। एक समान लक्ष्य की प्राप्ति हेतु प्रोग्रामों का लिखित या अंकित "समुच्चय" "सॉफ्टवेअर पैकेज" कहलाता है। यह दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है - "ऐप्लीकेशन सॉफ्टवेअर" और "सिस्टम सॉफ्टवेअर"


एप्लीकेशन सॉफ़्टवेयर



वह सॉफ़्टवेयर जिसे विशिष्ठ एप्लीकेशन के लिए डिज़ाइन किया गया है, एप्लीकेशन सॉफ़्टवेयर कहलाता है। आप एप्लीकेशन सॉफ़्टवेयर को “एंड यूज़र” सॉफ़्टवेयर की तरह मान सकते हैं, इसका अर्थ है सॉफ़्टवेयर के प्रकार जिसका आप उपयोग करते हैं। ये प्रोग्राम या तो “बेसिक” या “स्पेशलाइज़्ड” एप्लीकेशन के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।


बेसिक एप्लीकेशन



बेसिक एप्लीकेशन वह प्रोग्राम है जिससे अधिकतर कंप्यूटर सक्षम लोग परिचित होते हैं जैसे ब्राउज़र, वर्ड प्रोसेसर्स, स्प्रेडशीट एवं डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम। बिलिंग सिस्टम, एकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर या सॉफ़्टवेयर जो डॉक्यूमेंट को तैयार करने एवं स्टोरेज में सक्षम होता है के लिए सॉफ़्टवेयर तैयार करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।


स्पेशलाइज़्ड एप्लीकेशन



स्पेशलाइज़्ड एप्लीकेशन में वे प्रोग्राम शामिल होते हैं जो विशिष्ट क्षेत्रों जैसे ग्राफ़िक्स, ऑडियो, वीडियो, मल्टीमीडिया, वेब ऑथरिंग एवं आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस प्रोग्राम पर सूक्ष्म रूप से अधिक केन्द्रित रहता है।


सिस्टम सॉफ़्टवेयर



आप सिस्टम सॉफ़्टवेयर को कंप्यूटर द्वारा उपयोग किए जाने वाले सॉफ़्टवेयर के प्रकार के रूप में मान सकते हैं। यह प्रोग्रामों को सम्मिलित करने वाला “बैकग्राउंड सॉफ़्टवेयर” होता है जिसे कंप्यूटर अपने कार्य एवं डिवाइस को संतुलित करने के लिए उपयोग करता है। सिस्टम सॉफ़्टवेयर, कंप्यूटर हार्डवेयर से एप्लीकेशन सॉफ़्टवेयर को संपर्क बनाने के योग्य बनाता है।


ऑपरेटिंग सिस्टम



सिस्टम सॉफ़्टवेयर एक अकेला प्रोग्राम नहीं, बल्कि कुछ ऐसे प्रोग्रामों का संग्रह होता है जिनके काम में टूज़र का हस्तक्षेप बहुत कम या बिलकुल नहीं होता है। इसमें चार प्रकार के प्रोग्राम होते हैं-

“ऑपरेटिंग सिस्टम” कंप्यूटर संसाधन में सहयोग करता है, यूज़र और कंप्यूटर के बीच इंटरफ़ेस प्रदान करता है तथा एप्लीकेशन्स को चालू करता है।



यूटिलिटीज़



2.“यूटिलिटीज़” कंप्यूटर संसाधनों के प्रबंधन से संबंधित विशिष्ट कार्यों को करता है। उदाहरण के लिए, विंडोज़ यूटिलिटी “डिस्क डिफ़्रैगमेंटर” फ़ाइलों के अनुपयोगी खंडों को रिमूव करता है तथा फ़ाइल एवं बिना उपयोग किए गए डिस्क स्पेस को स्वतः पुर्नगठित करता है।


डिवाइस ड्राइवर्स



3.“डिवाइस ड्राइवर्स” एक स्पेशलाइज़्ड प्रोग्राम है जिसे शेष कंप्यूटर सिस्टम से संचार के लिए किसी ख़ास इनपुट या आउटपुट डिवाइस को अनुमति देने के लिए डिजाइन किया गया है।

भाषा अनुवादक


“भाषा अनुवादक” प्रोग्रामर द्वारा लिखे गए प्रोग्रामिंग निर्देशों को एक ऐसी भाषा में बदलती है जिसे कंप्यूटर समझ सके।



मेमोरी



मेमोरी में डेटा, निर्देश एवं सूचना रहती हैं। कंप्यूटर की आंतरिक मेमोरी मदरबोर्ड पर चिप के रूप में उपस्थित रहती है। अच्छी तरह से परिचित मेमोरी चिप तीन प्रकार की होती है- रैंडम ऐक्सेस मेमोरी (रैम), रीड ओनली मेमोरी (रोम) और कंप्लीमेंटरी मेटल-ऑक्साइड सेमिकंडक्टर (सीएमओएस)।


रैम 



"रैम" (रेंडम एक्सेस मेमोरी) :यह वो मेमोरी है, जिसका प्रयोग कंप्यूटर, प्रोग्रामों और उनके आँकड़ों पर काम करने हेतु, व उनके स्टोरेज के लिए करता है। उदाहरण के लिए, आप "शब्द क्रियान्वयन प्रक्रिया" (वर्ड प्रौसेसर ऐप्लीकेशन) का प्रयोग पत्रलेखन के समय करते है। जब आप "टैक्स्ट" को प्रविष्ट करते हैं, तो वह "रॅम" मे स्टोर हो जाता है। जब पत्र को "सुरक्षित" करते है, तो यह "रॅम" से चलकर हार्डडिस्क में स्टोर हो जाता है। बाद में आप जब भी चाहे पत्र को पुनः प्राप्त करके पढ़ सकते है, देख सकते है तथा मनचाहे परिवर्तन कर सकते हैं। इसप्रकार "रॅम" "स्क्रैचपैड" की तरह काम करता है और इसलिए "स्क्रैचपैड " अक्सर "मेमोरी" कहा जाता है।


अस्थाई या क्षणभंगुर स्टोरेज



रैम को अस्थाई या क्षणभंगुर स्टोरेज कहा जाता है क्योंकि अधिकांश प्रकार के रैम में से कंप्यूटर बंद होने के बाद सब कुछ मिट जाता है। यदि पावर बंद हो जाती है या किसी कारण से कंप्यूटर के इलेक्ट्रिक धारा में अवरोध आती है तो ऐसा ही होता है।


कैश मेमोरी (Cache Memory)


“कैश मेमोरी” बहुत अधिक तेज़ मेमोरी होती है जो सीपीयू में निर्मित होती है, या एक अलग चिप पर स्थित होती है। सभी कंप्यूटरों में कैशे नहीं होता है। कैशे मेमोरी, मेमोरी और सीपीयू के बीच अस्थाई उच्च-गति धारण क्षेत्र के रूप में कार्य के द्वारा प्रोसेसिंग का विकास करता है। रैम की सूचना को लगातार कैशे में कॉपी करने के लिए उपयोग किया जाता है। जब इसकी आवश्यकता होती है, तो सीपीयू कैशे से इस सूचना को तेज़ी से प्राप्त कर सकता है, इस तरह संपूर्ण सिस्टम की गति का विकास होता है।


फ्लैश मेमोरी



“फ्लैश मेमोरी” पावर में रुकावट होने पर भी डेटा को स्थाई रूप से रख सकता है। इस प्रकार का रैम अधिक मँहगा होता है और इसका उपयोग विशेष एप्लीकेशनों, जैसे डिजिटल सेल टेलिफ़ोन, डिजिटल वीडियो कैमरा एवं पोर्टेबल कंप्यूटर के लिए किया जाता है।


बाइट्स



जब आप कंप्यूटर मेमोरी की मात्रा के बारे में बात करते हैं, तो आप रैम की ही बात करते हैं। कंप्यूटर द्वारा संचालित कार्यों की जटिलता एवं आकार का सीधा संबंध रैम से होता है। उदाहरण के लिए, माइक्रोसॉफ़्ट ऑफिस 2007 को कम से कम 256 MB के रैम की आवश्यकता होती है। कंप्यूटर सिस्टम में अतिरिक्त रैम को जोड़ा जा सकता है। रैम की मात्रा बाइट्स में वर्णित होती है। सामान्य रूप में उपयोग होने वाली मेमोरी क्षमता के माप की तीन इकाइयों को प्रदर्शित तस्वीर में दिखाया गया है।


रॉम



रॉम चिप्स प्रोग्राम्स होते हैं जिनको फ़ैक्टरी में ही तैयार किया जाता है। सीपीयू रोम चिप्स से केवल डेटा को पुनः प्राप्त कर सकता है लेकिन इसे किसी अन्य तरीकों में परिवर्तित नहीं कर सकता है। रैम चिप्स के विपरीत, रोम चिप्स स्थाई होते हैं। इसमें कंप्यूटर के कार्यकलापों जैसे स्टार्ट करने, कीबोर्ड के बटनों को अपना कार्य देने एवं स्क्रीन पर कैरेक्टर को रखने के लिए विशेष निर्देश होते हैं। रोम में स्थित प्रोग्राम ज्यादातर नियंत्रण एवं कार्यकलापों के निरीक्षण का कार्य करते हैं। यह सिस्टम यूनिट से सारे इनपुट और आउटपुट डिवाइसों से ठीक ढंग से जुड़े होने की जांच करता है।


रॉम (ROM) की विशेषताएँ है



"रॉम" (ROM) की दो प्रमुख विशेषताएँ है


  1. "रॉम" मे विद्यमान निर्देश निष्पादित (एग्ज़ीक्यूट) तो किए जा सकते है किन्तु परिवर्तित नहीं किए जा सकते हैं। इसलिए ही उसका नाम "रीड ओनली मेमोरी" है।
  2.  जब कंप्यूटर बंद कर दिया जाता है, तो इसके निर्देश नष्ट नहीं होते, मिटते नहीं है। इसलिए "रॉम" "स्थिर" कहलाता है।



सीमॉस



कंप्लीमेंटरी मेटल-ऑक्साइड सेमीकंडक्टर (सीमॉस) चिप कंप्यूटर सिस्टम में लचीलापन एवं विस्तार प्रदान करता है। पीसी को सही ढंग से स्टार्ट करने के लिए इसमें सभी आवश्यक सूचनाएँ होती हैं। इस चिप में वर्तमान तिथि एवं समय, रैम की मात्रा, कीबोर्ड के प्रकार, माउस, मॉनीटर एवं डिस्क ड्राइव जैसे सूचना होती है। रैम के विपरीत, इसमें एक छोटी ऑन-बोर्ड बैटरी होती है, जो पावर प्रदान करती है और पावर के बंद होने पर इसकी विषय-वस्तु ख़त्म नहीं होती है। रोम के विपरीत, इसकी विषय-वस्तु कंप्यूटर सिस्टम में बदलाव होने पर जैसे रैम बढ़ाने या नए हार्डवेयर डिवाइस लगाने पर बदल सकती है।



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