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Introduction to Operating System in hindi for CCC computer Course ऑपरेटिंग सिस्टम का परिचय हिंदी में सीसीसी कंप्यूटर कोर्स के लिए

बुधवार, जून 12, 2019


परिचय



हेलो दोस्तों! अब हम ऑपरेटिंग सिस्टम की अवधारणाओं को समझने के साथ सीखना आरंभ करें। आप जानते ही होंगे कि किसी एक भाग को कंप्यूटर नहीं कहते। कंप्यूटर वास्तव में एक साथ कार्य करने वाले अनेक भागों की प्रणाली है। इसके भौतिक भाग, जिनको आप देख और छू सकते हैं, को सामूहिक रूप से हार्डवेयर कहते। ये विभिन्न भाग एक या अधिक कार्य करते हैं, जिनमें इनपुट, आउटपुट, प्रोसेसिंग, या स्टोरेज शामिल होते हैं। लेकिन क्या आप ये भी जानते हैं कि ये भाग परस्पर संचार कैसे करते हैं और आपके द्वारा निर्देशित विशिष्ट कार्य कैसे करते हैं। ये मानवीय भाषा को कैसे समझते हैं? यहीं पर ऑपरेटिंग सिस्टम का अस्तित्व सामने आता है। ऑपरेटिंग सिस्टम के बिना एक कंप्यूटर केवल एक ऐसे बक्से के सामान होता है जिसके विभिन्न अंग होते हैं। संक्षेप में, हम कह सकते हैं कि ऑपरेटिंग सिस्टम के बिना कोई कंप्यूटर सिर्फ एक बॉक्स की तरह होता है। 


इतिहास



हार्डवेयर के विपरीत, आप ऑपरेटिंग सिस्टम को छू या महसूस नहीं कर सकते, लेकिन आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि जब आप कंप्यूटर को ऑन करते हैं तो यह उसमें लोड होने वाली पहली चीज़ होती है। आरंभिक इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल सिस्टम में कोई ऑपरेटिंग सिस्टम नहीं होता था। उस समय के कंप्यूटर आज के कंप्यूटर की तुलना में इतने अधिक साधारण थे कि कंप्यूटर में प्रोग्राम अक्सर मेकैनिकल स्विच की पंक्तियों में एक-एक करके एंटर किये जाते थे। व्यावसायिक कंप्यूटर की उन्नति के साथ-साथ, हमें अनेक संख्या में ऑपरेटिंग सिस्टम सॉफ़्टवेयर प्राप्त हुए हैं । सबसे पहले माइक्रोसॉफ़्ट ने ऑपरेटिंग सिस्टम के विचार को प्रस्तुत किया, जिसका नाम में पहल विंडोज़ रखा गया। माइक्रोसॉफ़्ट विंडोज़ ने विश्व में पर्सनल कंप्यूटर की मार्केट पर राज्य किया। आइये सीखें कि ऑपरेटिंग सिस्टम ठीक तरह से क्या है।

ऑपरेटिंग सिस्टम


ऑपरेटिंग सिस्टम वह प्रोग्राम है जो कंप्यूटर को मनुष्यों के उपयोग के योग्य बनाता है। इसके बिना, साधारण सी चीज़ भी करने के लिये हज़ारों निम्न-स्तरीय ऑपरेशन करने पड़ेंगे। लेकिन ऑपरेटिंग सिस्टम की सहायता से आप आसानी से इन कार्यों को कर सकते हैं। ऑपरेटिंग सिस्टम का लक्ष्य हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर को व्यवस्थित और नियंत्रित करना होता है, जिससे उपकरण एक प्रभावशाली ढंग से कार्य करे। ऑपरेटिंग सिस्टम को विभिन्न स्रोतों का प्रबंधक भी माना जा सकता है। ऑपरेटिंग सिस्टम ही निश्चत करता है कि कंप्यूटर के किस स्रोत का उपयोग किस समस्या का समाधान करने में होगा और उनका उपयोग किस क्रम में किया जायेगा। आज सेल फ़ोन से लेकर वायरलेस ऐक्सेस पॉइंट तक हमारे दैनिक जीवन में उपयोग किये जाने वाले अनेक उपकरणों में ऑपरेटिंग सिस्टम पाया जाता है ।

ऑपरेटिंग सिस्टम



जब आप आधुनिक कंप्यूटर के सामने बैठते हैं, तो आपको काम करना बहुत आसान लगता है, लेकिन याद रखें, विभिन्न कार्यों को संपादित करने के लिये मशीन के अंदर ऑपरेटिंग सिस्टम को अनेक जटिल कार्य संपादित करने होते हैं। सभी अनिवार्य कार्यों को संभालने वाला परदे के पीछे कार्य करने वाला वास्तविक कार्यकर्ता ऑपरेटिंग सिस्टम होता है। ऑपरेटिंग सिस्टम किसी मूवी के निर्देशक के सामान होता है। वह मूवी में नज़र तो नहीं आता, लेकिन वह पटकथा, स्थान की योजना, शॉट के चयन, अभिनय की शैली, संगीत से लेकर मूवी के प्रभाव को प्रभावित करने वाली सभी चीज़ों का ध्यान रखता है। इसी प्रकार, ओएस कंप्यूटर हार्डवेयर में अनेक आतंरिक कार्य करता है, लेकिन हम इसे देख नहीं पाते। इसको जानना क्या सचमुच रोचक नहीं?

ऑपरेटिंग सिस्टम के उदाहरण


एक ग्राफ़िकल यूज़र इंटरफ़ेस के द्वारा यूज़र ऑपरेटिंग सिस्टम से सीधे संपर्क बना सकते हैं। अधिकतर जीयूआई डेस्कटॉप नामक एक स्थान प्रदान करते हैं। ऑपरेटिंग सिस्टम के उदाहरण हैंरू विंडोज़, नॉवेल नेटवेयर, मैक ऑस, यूनिक्स और लाइनक्स।

ऑपरेटिंग सिस्टम की क्रियाएँ


किसी ऑपरेटिंग सिस्टम क्रियाओं को इन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है
  1. यूज़र एवं कंप्यूटर के बीच संचारक
  2. प्रक्रियाओं का प्रबंधन
  3. पेरीफ़ेरल प्रबंधन
  4. मेमोरी प्रबंधन


यूज़र एवं कंप्यूटर के बीच संचारक


ऑपरेटिंग सिस्टम की प्रमुख क्रियाओं में से एक है यूज़र और कंप्यूटर के बीच संचार का प्रामाणिक साधन स्थापित करना। कंप्यूटर के हार्डवेयर एक दूसरे से संचार करने के लिये मानव द्वारा उपयोग की जाने वाली भाषा को नहीं समझते। लेकिन आप सोच रहे होंगे कि तब हमें कंप्यूटर से बिलकुल सही परिणाम कैसे प्राप्त होते हैं? दरअसल यह ऑपरेटिंग सिस्टम ही होता है, जो हमारे इनपुट को उस भाषा में परिवर्तित करता है जिसे हार्डवेयर समझ सके। यह आउटपुट को यूज़र द्वारा समझी जाने वाली भाषा में परिणत करता है। आपने अनुवादकों को देखा ही होगा जो एक भाषा को दूसरी में परिणत करते हैं। इसी प्रकार, ऑपरेटिंग सिस्टम भी एक अनुवादक होता है। क्या यह आश्चर्यजनक नहीं लगता?

प्रक्रियाओं का प्रबंधन


ऑपरेटिंग सिस्टम की प्रमुख क्रियाओं में से एक है प्रक्रियाओं का प्रबंधन। ऑपरेटिंग सिस्टम विभिन्न एप्लीकेशनों को एक साथ चलाने की सुविधा देता है। यह प्रोसेस होने वाले विभिन्न प्रोसेसों का पाता लगाता है और प्रत्येक प्रोसेस की प्रोसेसिंग का प्रबंधन करता है। प्रोसेस प्रबंधन किसी ट्रैफ़िक सिग्नल पर खड़े एक ट्रैफ़िक नियंत्रक की तरह होते हैं। ट्रैफ़िक नियंत्रक का कार्य बिना किसी ट्रैफ़िक जाम या दुर्घटना के सभी ट्रैफ़िक का प्रबंधन करना है। इसी प्रकार, प्रोसेस प्रबंधन का कार्य बिना किसी टकराव या गतिरोध के सभी प्रोसेसों का प्रबंधन करना है।


पेरीफ़ेरल प्रबंधन


ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर से जुड़े विभिन्न इनपुट/आउटपुट उपकरणों के कार्यों का प्रबंधन करता है। प्रिंटर और स्कैनर जैसे विभिन्न इनपुट और आउटपुट उपकरण ऑपरेटिंग सिस्टम के नियंत्रण के अंतर्गत कार्य करते हैं। ऑपरेटिंग सिस्टम किसी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर की भांति होता है, जो अपने सहकर्मियों को विभिन्न कार्य सौंपता है जिससे वे उसे कुशलतापूर्वक कर सकें। इसी प्रकार, ऑपरेटिंग सिस्टम किसी प्रोजेक्ट मैनेजर की तरह होता है, जो सभी उपकरणों पर अपना नियंत्रण रखता है ताकि वे प्रभावशाली और कुशलतापूर्वक ढंग से कार्य कर सकें। ऑपरेटिंग सिस्टम की भूमिका सचमुच चमत्कारिक है!


मेमोरी प्रबंधन


मेमोरी प्रबंधन ऑपरेटिंग सिस्टम के सर्वाधिक प्रमुख कार्यों में से एक है। ऑपरेटिंग सिस्टम यह निर्णय करता है कि कौन सी फ़ाइल मेमोरी में किस स्थान पर स्टोर होगी। प्राइमरी (रैम) और सेकेंडरी (रोम) दोनों प्रकार की मेमोरी ऑपरेटिंग सिस्टम के नियंत्रण में कार्य करती हैं। आसान शब्दों में, रैम एक शोरूम की तरह है, जबकि हार्ड डिस्क एक गोदाम की तरह है और सीपीयू दूकानदार के सामान है। जब भी कोई यूज़र सीपीयू से कोई प्रोग्राम मांगता है, यह पहले रैम (शोरूम) में जांचता है, या फिर हार्ड डिस्क (गोदाम) में से खोजता है। इसे समझना कितना आसान है!



ऑपरेटिंग सिस्टम


ऑपरेटिंग सिस्टम ऐसा प्रोग्राम है, जो एक बूट प्रोग्राम के द्वारा आरंभ में कंप्यूटर में लोड करने के बाद कंप्यूटर में स्थित अन्य सभी प्रोग्राम का प्रबंधन करता है। यह किसी कंप्यूटर में स्थित सबसे बेसिक प्रोग्राम है। अन्य प्रोग्राम को एप्लीकेशन या एप्लीकेशन प्रोग्राम कहते हैं। एप्लीकेशन प्रोग्राम एक निश्चित एप्लीकेशन प्रोग्राम इंटरफ़ेस (एपीआई) के द्वारा सेवाओं का अनुरोध करके ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग करता है।


ऑपरेटिंग सिस्टम के कार्य


किसी ऑपरेटिंग सिस्टम के कार्यों को तीन समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है-
  1. स्रोतों का प्रबंधन 
  2. यूज़र इंटरफ़ेस प्रदान करना 
  3. एप्लीकेशन रन करना

स्रोतों का प्रबंधन


ऑपरेटिंग सिस्टम का कार्य कंप्यूटर को सर्वाधिक मूलभूत स्तर पर नियंत्रित करना होता है। यह यूज़र को साधन उपलब्ध कराके और एप्लीकेशन प्रोग्राम को बताकर कि हार्डवेयर को क्या करना है, मेमोरी का प्रबंधन करता है, पेरीफ़ेरल डिवाइस को ऐक्सेस करने को नियंत्रित करता है और यूज़र एवं हार्डवेयर के बीच अनुवादक की तरह कार्य करता है।


यूज़र इंटरफ़ेस प्रदान करना


यूज़र एक यूज़र इंटरफ़ेस के ज़रिये एप्लीकेशन प्रोग्राम और कंप्यूटर हार्डवेयर से संचार करते हैं। अनेक पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम कैरेक्टर पर आधारित इंटरफ़ेस का उपयोग करते हैं, जिनमें यूज़र लिखे गए कमांडों के ज़रिये ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ संचार करता है। लगभग सभी नए ऑपरेटिंग सिस्टम ग्राफ़िकल यूज़र इंटरफ़ेस (जीयूआई) का उपयोग करते हैं।


ऑपरेटिंग सिस्टम द्वारा प्रदान की गयी सेवाएँ


एप्लीकेशनों के लिये एक ऑपरेटिंग सिस्टम इन सेवाओं को प्रदान करता है-


  1. यह विभिन्न एप्लीकेशनों के बीच आतंरिक मेमोरी के आदान-प्रदान का प्रबंधन करता है।
  2. यह संलग्न हार्डवेयर उपकरणों, जैसे हार्ड डिस्क, प्रिंटर, और डायल-अप पोर्ट्स में तथा द्वारा इनपुट और आउटपुट को संभालता है।
  3. यह कार्य की स्थिति और यदि कोई एरर होता है, तो उनके विषय में प्रत्येक एप्लीकेशन अथवा इंटरऐक्टिव यूज़र (अथवा किसी सिस्टम ऑपरेटर) को सन्देश भेजता है।

बूटिंग


किसी कंप्यूटर को स्टार्ट या रीस्टार्ट करने को सिस्टम को बूट करना कहते हैं। किसी कंप्यूटर को बूट करने के दो तरीके होते हैं, वार्म बूट और कोल्ड बूट। वार्म बूट तब होता है जब कंप्यूटर पहले से ही खुला हुआ हो और आप पावर बंद किये बिना इसे रीस्टार्ट करते हैं। उदाहरण के लिये, विंडोज़ 7 में, आप स्टार्ट बटन दबाकर, शट डाउन बटन के दाहिनी ओर स्थित ऐरो पर क्लिक करके रीस्टार्ट को सेलेक्ट करके किसी चलते हुए कंप्यूटर को रीस्टार्ट कर सकते हैं। किसी ऐसे कंप्यूटर को स्टार्ट करना जिसे बंद किया जा चुका हो कोल्ड बूट कहते हैं।


ऑपरेटिंग सिस्टम के उदाहरण


किसी कमांड लैंग्वेज या ग्राफ़िकल यूज़र इंटरफ़ेस (जीयूआई) जैसे किसी यूज़र इंटरफ़ेस के द्वारा यूज़र ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ सीधे संपर्क कर सकते हैं। अधिकांश जीयूआई डेस्कटॉप नामक एक स्थान प्रदान करते हैं, जो कंप्यूटर के स्रोतों को ऐक्सेस करने की अनुमति देते हैं। ऑपरेटिंग सिस्टम के उदाहरण हैंरू विंडोज़, नॉवेल, नेटवेयर, मैक ऑस, यूनिक्स और लाइनेक्स।



सामान्य लक्षण


ऑपरेटिंग सिस्टम के अनेक फ़ीचर एप्लीकेशन प्रोग्राम्स के सामान होते हैं, जैसे निम्नलिखित-
आयकॉन- ये किसी प्रोग्राम या फ़ंक्शन के ग्राफ़िकल निरूपण होते हैं।
पॉइंटर- इसका नियंत्रण माउस के द्वारा होता है, और अपने वर्तमान कार्य के अनुरूप इसका आकार बदल जाता है। उदाहरण के लिये, किसी ऐरो के सामान होने पर, पॉइंटर का उपयोग आयकॉन जैसी किसी सामग्री को सेलेक्ट करने के लिये किया जा सकता है।

विंडोज़, मेन्यू एवं डायलॉग बॉक्स

विंडोज़ - ये सूचना प्रदर्शित करने के लिये तथा प्रोग्राम्स को रन आयताकार क्षेत्र होते हैं।

मेन्यू - ये विकल्पों एवं कमांडों की एक सूची प्रदान करते हैं।

डायलॉग बॉक्स- ये वो विंडोज़ होती हैं, जो सूचना अथवा अनुरोध इनपुट प्रदान करती हैं।

हेल्प - विभिन्न कार्यों एवं प्रक्रियाओं के लिये ऑनलाइन सहयोग प्रदान करता है।


सॉफ़्टवेयर संबंधी पारिस्थिति (एनवायरंमेंट)


ऑपरेटिंग सिस्टम को अक्सर सॉफ़्टवेयर एनवायरंमेंट अथवा प्लेटफ़ॉर्म के नाम से पुकारा जाता है। लगभग सभी एप्लीकेशन प्रोग्राम किसी विशिष्ट प्लेटफ़ॉर्म पर रन करने के लिये तैयार किये जाते हैं। उदाहरण के लिये, एपलवर्क्स का मानक वर्ज़न मैक ऑस एनवायरंमेंट के साथ रन करने के लिये तैयार किया गया है।


विंडोज़ 7


विंडोज़ 7 माइक्रोसॉफ़्ट विंडोज़ का नवीनतम रिलीज़ है। इसमें विंडोज़ ऐरो ग्राफ़िकल यूज़र इंटरफ़ेस है, जिसे विंडोज़ विस्टा में प्रस्तुत किया गया था। ग्लास विंडो बॉर्डर और सतहें इंटरफ़ेस को व्यावसायिक और सुन्दर स्वरूप प्रदान करते हैं। कुछ नए फ़ीचर हैं, टच, स्पीच, और हैंड-राइटिंग रिकग्निशन में उन्नति। अब वर्चुअल हार्ड डिस्क और अतिरिक्त फ़ाइल फ़ॉर्मैट के लिये सपोर्ट शामिल किया गया है। यह मल्टी-कोर प्रोसेसर पर बेहतर प्रदर्शन प्रदान करते हैं। यूज़र को संशोधित बूट प्रदर्शन और साथ ही कर्नेल में सुधार देखने को मिलेगा।


फ़ीचर


इसमें कुछ नए बेहतरीन फ़ीचर हैं, जो डेस्कटॉप पर कार्य करने को एक श्रेष्ठ अनुभव साबित करते हैं। डेस्कटॉप वॉलपेपर का स्वतः बदलना इनमें से एक है। एरो पीक फ़ीचर की मदद से आप डेस्कटॉप पर या किसी खुली हुई विंडो की सामग्री को झांककर देख सकते हैं। एरो पीक फ़ीचर की मदद से आप डेस्कटॉप पर विंडोज़ को आसानी से संभाल सकते हैं। जंप लिस्ट फ़ीचर आपकी आवश्यकता की चीज़ों के लिये आसान ऐक्सेस देता है। निम्नलिखित लैब में आप इन फ़ीचरों के विषय में विस्तार से सीखेंगे।


ब्लू-रे डिस्क


आजकल ब्लू-रे डिस्क ने हाई-डेफ़िनिशन डीवीडी वार पर विजय हासिल कर ली है। केवल एक ब्लू-रे डिस्क में अतनी मात्र में डेटा स्टोर करना सम्भव है, जितना कि किसी हार्ड डिस्क में किया जा सकता है। विंडोज़ 7 में ब्लू-रे डिस्क को रीड और राईट करने की क्षमता शामिल है। विंडोज़ का यह वर्ज़न आपको विंडोज़ मीडिया प्लेयर में वीडियो और मीडिया फ़ाइल स्ट्रीम करने की सुविधा देता है। स्ट्रीमिंग लोकल नेटवर्क और इंटरनेट दोनों से संभव है।


विविध उदाहरण


क्या आपने कभी भी एक ही प्रोग्राम के विविध उदाहरण विंडोज़ के पुराने वर्ज़न पर खोलें हैं? ज़ाहिर तौर पर नहीं, लेकिन विंडोज़ 7 आपको ऐसा करने की सुविधा देता है। टास्कबार में प्रोग्राम के पहले उदाहरण पर लेफ़्ट-क्लिक करते समय बस शिफ़्ट बटन को दबाकर रखें। दूसरा उदाहरण खुल जाएगा।


विंडोज़ एक्सपी मोड


अधिकांश एप्लीकेशन विंडोज़ 7 पर भली-भांति चलती हैं, लेकिन कुछ ऐसी भी हैं जो विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम के नवीनतम वर्ज़न के अनुरूप नहीं हैं। अतः असंगतता की इस समस्या को कनफ़िगर करने के लिये विंडोज़ 7 ने विंडोज़ एक्सपी मोड के फ़ीचर प्रस्तुत किये हैं। यह फ़ीचर आपको वर्चुअल पीसी नामक टूल्स के समूह की सहायता से विंडोज़ 7 के अंदर ही एक्सपी के पूरे क्रियाशील वर्ज़न को चलाने की सुविधा देता है।

डायरेक्ट ऐक्सेस


ऐसी समीक्षा की गयी है कि डायरेक्ट ऐक्सेस सर्वाधिक प्रभाशाली कारणों में से एक है, जिसके कारण व्यापारिक संस्थान विंडोज़ 7 के लिये अपग्रेड कर रहे हैं। डायरेक्ट ऐक्सेस आतंरिक नेटवर्कों के बीच या इंटरनेट पर बाई-डायरेक्शनल लिंक स्थापित करने में सहायक होता है। इस फ़ीचर की मदद से विभिन्न यूज़र दूर से ही इंटरनेट पर कॉर्पाेरेट सर्वर एवं नेटवर्क को ऐक्सेस कर पाते हैं।


बूटिंग टाइम


विंडोज़ 7 का एक प्रशंसनीय फ़ीचर इसका बूटिंग में लगने वाला समय है; यह विंडोज़ विस्टा की अपेक्षा 20% अधिक तेज़ है। बूट के बाद लॉगिन प्रोम्प्ट नज़र आने में लगभग 27 सेकंड लगते हैं, जबकि यदि विंडोज़ विस्टा से तुलना की जाये तो इसी कार्य में उसमें 34 सेकंड लगते हैं।


विंडोज़ एक्शन सेंटर


विंडोज़ 7 में, सुरक्षा सेंटर, जिसे विंडोज़ एक्शन सेंटर कहते हैं, कंप्यूटर की सुरक्षा और रखरखाव दोनों का कार्य करता है।



एन्क्रिप्शन


विंडोज़ विस्टा में सर्वप्रथम प्रस्तुत किये गए फुल-ड्राइव एन्क्रिप्शन फ़ीचर को विंडोज़ 7 में अपडेट किया गया है, जो फ़्लैश मेमोरी ड्राइव और पोर्टेबल हार्ड ड्राइव जैसी निकाली जा सकने वाली यूएसबी स्टोरेज डिवाइस को सपोर्ट कर सके।


विंडोज़ कैलकुलेटर


विंडोज़ कैलकुलेटर विंडोज़ 7 की यूटिलिटी में किया गया प्रमुख अपग्रेडेशन है, जिसमें गणना, इतिहास, यूनिट कनवर्ज़न, कैलकुलेशन टेम्पलेट्स, डेटा कैलकुलेशन, और अन्य नए फ़ीचर शामिल हैं।


विंडोज़ डिस्प्ले


विंडोज़ 7 में कंप्यूटर डिस्प्ले से संबंधित अनेक सुधार किये गए हैं, जिनमें इंटीग्रेटेड डिस्प्ले कलर कैलिब्रेशन, संशोधित उच्च स्तरीय डीपीआई सपोर्ट, क्लियरटाइप, और बाहरी डिस्प्ले के लिये संशोधित सपोर्ट शामिल हैं। एक नयी विंडोज़ की $ च् कीबोर्ड शॉर्टकट की सहायता से आप आसानी से जुड़े हुए विभिन्न डिस्प्ले के बीच स्विच कर सकते हैं। कंप्यूटर ओनली डिफ़ॉल्ट में दिया गया विकल्प है। डुप्लिकेट एक सेकेंडरी डिस्प्ले, मॉनीटर या प्रोजेक्टर पर आपकी स्क्रीन की प्रतिलिपि प्रस्तुत करता है। एक्सटेंड डेस्कटॉप को विस्तृत कर देता है जिससे आपको अतिरिक्त विंडोज़ के लिए स्थान मिल सके। प्रोजेक्टर ओनली आपके मॉनीटर को बंद कर देता है और आपके मॉनीटर पर प्रोजेक्टर ऑन कर देता है।


होमग्रुप


माइक्रोसॉफ़्ट ने नेटवर्क पर आधारित सर्वाधिक सामान्य शेयरिंग के कार्यों को एक सरल इंटरफ़ेस में एकीकृत कर दिया है, जिसे होमग्रुप कहते हैं। किसी होमग्रुप में स्थित कंप्यूटर होम नेटवर्क पर आसानी से डॉक्यूमेंट, डिजिटल मीडिया फ़ाइल, और प्रिंटर का आदान-प्रदान कर सकते है


स्निपिंग टूल


स्निपिंग टूल आपके डेस्कटॉप पर स्थित किसी भी चीज़, जैसे कोई तस्वीर या वेबपेज के किसी भाग का स्क्रीन शॉट ले लेता है। आप पूरी विंडो, स्क्रीन के एक आयताकार भाग को स्निप कर सकते हैं, या अपने माउस या टेबलेट पेन से एक फ़्रीहैंड रूपरेखा बना सकते हैं।


पेरेंटल कंट्रोल


विंडोज़ 7 में उपलब्ध पेरेंटल कंट्रोल की क्रियाएँ विभिन्न गेम को रेट देने की प्रणाली और पेरेंटल कंट्रोल प्रोवाइडर्स को सपोर्ट करती हैं।



प्रॉब्लम स्टेप रेकॉर्डर


विंडोज़ 7 में प्रॉब्लम स्टेप रेकॉर्डर नामक एक नयी यूटीलिटी शामिल है, जो यूज़र द्वारा की जाने वाली क्रियाओं का स्क्रीन शॉट ले लेता है, जिससे हेल्प डेस्क प्रोवाइडर डेस्कटॉप को जांचने के लिये बिना स्वयं आये समाधान बता सके।


रिबन


माइक्रोसॉफ़्ट ने ऑफ़िस 2007 से रिबन के नियंत्रण में प्रगति की है और इसे विंडोज़ 7 में ऑपरेटिंग सिस्टम का अंग बनाया है। रिबन के इस नए वर्ज़न, जिसे सीनिक रिबन कहते हैं, का उपयोग विंडोज़ 7 की एप्लीकेशन, पेन्ट तथा वर्डपैड में किया जाता है, और थर्ड पार्टी के द्वारा भी इनका उपयोग किया जा सकता है।


जंप-लिस्ट


विंडोज़ 7 में नयी जंप-लिस्ट यूटिलिटी शामिल है, जिससे वाई-फ़ाई, मोबाइल ब्रॉडबैंड, डायल-अप, तथा वीपीएन कनेक्शन को खोजाकर कनेक्ट किया जा सकता है। विंडोज़ विस्टा में इसी प्रकार के यूज़र इंटरफ़ेस के विपरीत, व्यू अवेलेबल नेटवर्क्स नामक इस यूटिलिटी में आपको डायलॉग और विन्डोज़ की एक श्रृंखला से नहीं गुज़रना पड़ता है।


विंडोज़ मीडिया प्लेयर


माइक्रोसॉफ़्ट के मीडिया प्लेयर में विंडोज़ 7 के साथ प्रमुख संशोधन हुए, जिनमें उन्नत डीवीडी प्लेबैक, नया-पतला सा नाव प्लेइंग मोड अत्यधिक संशोधित फ़ॉर्मैट संबंधी सुसंगतता (एएसी एवं एच 1264 सहित), विन्डोज़ टास्कबार जंप लिस्ट कस्टमाइज़ेशन, पीसी-टू-पीसी एवं इंटरनेट पर आधारित मीडिया स्ट्रीमिंग, और नया प्ले टू फ़ीचर शामिल हैं।


क्रिडेन्शियल मैनेजर


नए एवं संशोधित में स्थित विंडोज़ 7 क्रिडेन्शियल मैनेजर आपको यूज़र नेम और पासवर्ड जैसे क्रिडेन्शियल सेव करने की सुविधा देता है, जिससे आप विभिन्न वेब साइट, नेटवर्क के कंप्यूटरों तथा अन्य स्रोतों से स्वतः ही अधिक आसानी से लॉगऑन कर सकें।


नवीनतम वर्ज़न


विंडोज़ 7 माइक्रोसॉफ़्ट के नवीनतम वेब ब्राउज़र, इंटरनेट एक्सप्लोरर 8 के साथ आता है जो फ़ेवरिट बार, वेब स्लाइस, एक्सिलरेटर्स, विज़ुअल सर्च, और इन प्राइवेट ब्राउज़िंग जैसे नए फ़ीचर प्रदान करता है।

वर्चुअल हार्ड डिस्क


विंडोज़ 7 में एक्सप्लोरर में एक ड्राइव के रूप में वर्चुअल हार्ड डिस्क (वीएचडी) डालने की सुविधा है, जिससे आप किसी सामान्य हार्ड डिस्क की तरह इसकी सामग्री में नेविगेट कर सकें। यह वीएचडी तस्वीरों से बूट करने की सुविधा भी प्रदान करता है।

विंडोज़ लाइव सर्विसेज़


विंडोज़ 7 विंडोज़ लाइव सर्विसेज़ के विस्तृत संकलन के साथ आता है, जिनमें विंडोज़ लाइव फ़ोटो, विंडोज़ लाइव प्रोफ़ाइल, विंडोज़ लाइव पीपल, विंडोज़ लाइव स्पेसेज़, विंडोज़ लाइव होम, विंडोज़ लाइव स्काईड्राइव, विंडोज़ लाइव ग्रुप, विंडोज़ लाइव कैलेंडर, विंडोज़ लाइव इवेंट्स, विंडोज़ लाइव हॉटमेल, और बहुत कुछ शामिल हैं।


कंप्यूटर ऑन करना


आपके कंप्यूटर में विंडोज़ 7 लॉग ऑन करने का प्रथम चरण है, आपके कंप्यूटर को प्लग करके इसे ऑन करना। यदि आपके कंप्यूटर से यूपीएस जुड़ा हो तो उसे ऑन करें और फिर सीपीयू ऑन करके मॉनीटर को ऑन करें। कंप्यूटर के बूट होने की प्रतीक्षा करें।

विंडोज़ 7 में लॉगिंग करना


विंडोज़ 7 की लॉग ऑन स्क्रीन प्रदर्शित होती है। विंडोज़ 7 में लॉगिंग करने के लिये अपने यूज़र नेम पर क्लिक करें और अपना पासवर्ड एंटर करें। सभी स्टार्टअप प्रोग्राम के लोड होने तक प्रतीक्षा करें। आपके लॉग ऑन करने पर रन करने के लिये शेड्यूल प्रोग्राम की संख्या के आधार पर स्टार्टअप में समय लगेगा। कुछ मिनट के बाद, आप विंडोज़ 7 का डेस्कटॉप देख सकते हैं, जहाँ आपकी एप्लीकेशन, शॉर्टकट और मेन्यू स्थित होते हैं। अब आप काम करने के लिये तैयार हैं।